अभी ये कविता अधूरी ही है ..............जब मिलुंगा तुमसे तब कहूँगा और कुछ !



हर हफ्ते सोचता हूँ
और हर हफ्ते इतवार निकल जाता है...
तुमसे मिले हुए अरसा हुआ दोस्त,
अक्सर याद करता हूँ तुमको
और सोचता हूँ...
इतना मुश्किल थोड़े ही है तुमसे मिलना
बातें करना
खेलना
हँसना।
मेरे पास ना सही साथ तो हो ही !
कई बार तो तुम शहर में होते भी नहीं हो
मगर मैं मिलने की सोचता रहता हूँ .............
..................................
अभी ये कविता अधूरी ही है
जब मिलुंगा तुमसे तब कहूँगा और कुछ !।

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